नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंधुः ईरान से नेपाल और श्रीलंका के नागरिकों को भी वापस लाएगा भारत अब तक 827 की वतन वापसी भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन सिंधु’ अब एक व्यापक मानवीय मिशन का रूप ले चुका है। पहले केवल भारतीय नागरिकों को युद्धग्रस्त क्षेत्रों से सुरक्षित निकालने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस मिशन में अब भारत ने अपने पड़ोसी देशों – नेपाल और श्रीलंका – के नागरिकों को भी शामिल कर लिया है। यह कदम भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और मानवीय सहायता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, ईरान में हाल ही में बिगड़े हालात और वहां बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय दूतावास ने नजदीकी पड़ोसी देशों के नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी पहल की है। ऑपरेशन सिंधु के तहत विशेष विमान और नौसेना के जहाजों की सहायता से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
युद्धग्रस्त क्षेत्रों से बचाव अभियान
ऑपरेशन सिंधुः ईरान से नेपाल और श्रीलंका के नागरिकों को भी वापस लाएगा भारत अब तक 827 की वतन वापसी ईरान में हाल ही में आतंकी घटनाओं और सैन्य तनाव के कारण स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। कई दक्षिण एशियाई देशों के नागरिक कामकाज या तीर्थयात्रा के सिलसिले में वहां फंसे हुए थे। भारत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपने नागरिकों को प्राथमिकता के आधार पर निकालना शुरू किया, और साथ ही नेपाल और श्रीलंका के दूतावासों से संपर्क कर उनके नागरिकों को भी शामिल करने की अनुमति ली।
विशेष विमान और नौसेना की मदद
भारतीय वायुसेना द्वारा भेजे गए विशेष विमानों ने अब तक सैकड़ों भारतीयों के साथ-साथ दर्जनों नेपाली और श्रीलंकाई नागरिकों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। नौसेना की युद्धपोतें भी फारस की खाड़ी में सक्रिय हैं, जो समुद्री मार्ग से निकासी के लिए तैयार हैं।
मानवीय मूल्यों की मिसाल
ऑपरेशन सिंधुः ईरान से नेपाल और श्रीलंका के नागरिकों को भी वापस लाएगा भारत अब तक 827 की वतन वापसी भारत के इस कदम को वैश्विक समुदाय ने भी सराहा है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस ने भारत की तत्परता और सहयोग भावना की सराहना की है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस अभियान के माध्यम से भारत ने दक्षिण एशिया में एक जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाई है।
नेपाल और श्रीलंका की प्रतिक्रिया
नेपाल और श्रीलंका की सरकारों ने भारत को इस सहायता के लिए धन्यवाद दिया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “भारत ने संकट की घड़ी में हमारे नागरिकों की मदद कर एक बार फिर दिखा दिया कि वह सच्चा मित्र देश है।”
श्रीलंका ने भी भारत की मदद को एक ‘उदार मित्रवत कदम’ बताया और कहा कि भविष्य में भी दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ़ होंगे।
निष्कर्ष
‘ऑपरेशन सिंधु’ अब केवल एक निकासी अभियान नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, मानवीय दृष्टिकोण और क्षेत्रीय एकता का प्रतीक बन गया है। जब दुनिया के कई देश अपने-अपने नागरिकों तक सीमित रह जाते हैं, तब भारत ने यह दिखाया है कि मानवता की कोई सीमा नहीं होती। इस प्रयास ने न केवल भारत की छवि को वैश्विक स्तर पर मजबूती दी है, बल्कि यह भी प्रमाणित किया है कि संकट की घड़ी में भारत न केवल अपने बल्कि अपने पड़ोसियों का भी सच्चा सहारा है।
