VARANASI NEWS गंगा किनारे मकानों की मरम्मत को मिली मंजूरी, भवन मालिक अब आसानी से करा सकेंगे सुधार कार्य

VARANASI NEWS गंगा किनारे मकानों की मरम्मत को मिली मंजूरी, भवन मालिक अब आसानी से करा सकेंगे सुधार कार्य  में गंगा के तट से 200 मीटर क्षेत्र में स्थित निजी भवनों के मरम्मत व पुनर्निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी व तेज़ बनाने के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) ने हाल में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अब भवन स्वामी VDA मुख्यालय के हेल्पडेस्क की जगह अपने नजदीकी जोनल कार्यालय में जाकर सीधे आवेदन जमा कर सकते हैं और आवेदन का निस्तारण केवल 30 दिनों में होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, कुछ सामान्य मरम्मत कार्यों के लिए अब पूर्व में किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। आइए विस्तार से जानें—


🛠️ मुख्य बदलाव और आदेश की पृष्ठभूमि

  1. नई प्रक्रिया की शुरुआत
    VARANASI NEWS  VDA के उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग ने स्पष्ट किया है कि पुराने समय में, भवन स्वामी गंगा नदी के 200 मीटर की दूरी के भीतर मरम्मत के लिए VDA हेल्पडेस्क से फार्म खरीदते थे, दस्तावेज़ जमा करते थे और फिर लम्बे समय तक निर्णय की प्रतीक्षा करते रहते थे। अब इसे रद्द करते हुए, जोनल कार्यालयों पर सुविधा देने का निर्णय लिया गया है ताकि आवेदन स्थानीय स्तर पर ही निस्तारित हों etvbharat.com+4bhaskar.com+4etvbharat.com+4

  2. 30 दिन में अंतिम निस्तारण
    VARANASI NEWS  आदेशित है कि आवेदन प्राप्त होने के बाद कम से कम 30 दिनों के भीतर जोनल अधिकारी द्वारा उसका अंतिम निस्तारण करवाया जाए—जिसके लिए अधिकारी उत्तरदायी होंगे

  3. ऑनलाइन सुविधा भी शुरू
    VARANASI NEWS  भवन स्वामी अब VDA की आधिकारिक वेबसाइट (vdavns.com) पर जाकर ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। ऑनलाइन फाइलिंग के बाद पेमेंट गेटवे के माध्यम से शुल्क का निपटान होता है, जिससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी


✅ किन कार्यों के लिए अनुमति अनिवार्य नहीं

निम्नलिखित मरम्मत कार्यों के लिए अब VDA से अनुमति की ज़रूरत नहीं पड़ेगी livehindustan.com+4etvbharat.com+4bhaskar.com+4:

  • दीवारों पर सीमेंट या प्लास्टर का पूरा या आंशिक कार्य

  • फर्श का पुनर्निर्माण और रंग–सफेदी कराना

  • सेप्टिक टैंक या सोक पिट की स्थापना

  • हैंडपम्प लगाना

  • पाइप, केबल, नालियों आदि के नवीनीकरण के निर्माण कार्य

  • छत पर सौर ऊर्जा से जुड़ी संरचनाएँ

यह बदलाव पुराने, खंडहर भवनों की मरम्मत को बिना अतिरिक्त विलंब के सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।


⚠️ किन कार्यों के लिए अभी भी अनुमति ज़रूरी

वहीं, कुछ कार्यों के लिए अनुमति आवश्यक होगी

  • किसी दीवार का पुनःनिर्मাণ

  • किसी भवन का गिराकर नया निर्माण

  • छत, बालकनी, बरामदे में पैरापेट का निर्माण

  • वास्तु दोष सुधार या आंतरिक संरचना में बदलाव


🎯 इस पहल का उद्देश्य और लाभ

  • समय की बचत – आवेदन अब स्थानीय स्तर पर ही निपटेंगे, VDA मुख्यालय की यात्रा की आवश्यकता खत्म livehindustan.comlivevns.news+1livehindustan.com+1

  • पारदर्शिता – निर्धारित 30-दिन की समयसीमा से प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बनी।

  • डिजिटलीकरण – ऑनलाइन आवेदन ने प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाया।

  • सुरक्षित विरासत संरचना – प्राचीन, जर्जर भवनों की मरम्मत और संरक्षित रखरखाव संभव हुआ, जो कभी लापरवाही की वजह से दुर्घटनाग्रस्त हो सकते थे bhaskar.com+3etvbharat.com+3livehindustan.com+3etvbharat.com


📊 आंकड़े: मरम्मत और अनुपालन

  • वित्त वर्ष 2023–24 में मरम्मत/पुनर्निर्माण के 23 आवेदन स्वीकृत हुए।

  • इसी प्रकार, 2024–25 में अब तक 19 आवेदन मिल चुके हैं livehindustan.com+3etvbharat.com+3livevns.news+3

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि पहले से ही कई भवनों की मरम्मत की जा चुकी थी, लेकिन अब प्रक्रिया और तेजी व गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ेगी।


🌇 वाराणसी: बड़ी तस्वीर में यह परिवर्तन

VARANASI NEWS गंगा किनारे मकानों की मरम्मत को मिली मंजूरी, भवन मालिक अब आसानी से करा सकेंगे सुधार कार्य संस्कृति व पर्यटन के लिहाज़ से वराçस —या ‘घाटों की नगरी’— में गंगा के किनारे मकानों—even private structures—की मरम्मत न सिर्फ संपत्ति की रक्षा बल्कि सांस्कृतिक और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण है।

इस कदम से वांछित रूप से जुड़ी:

  • लोक जागरूकता — यह जनता को ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव के लिए न्यायसंगत प्रक्रिया की जानकारी देता है।

  • प्रशासन की जवाबदेही — अधिकारी अब समय सीमा का पालन सुनिश्चित करेंगे।

  • डिजिटलीकरण — आवेदन अब बिना किसी दफ्तर की दौड़धूप के ऑनलाइन भरे जा सकते हैं।


📌 निष्कर्ष

VARANASI NEWS गंगा किनारे मकानों की मरम्मत को मिली मंजूरी, भवन मालिक अब आसानी से करा सकेंगे सुधार कार्य  निष्कर्षतः, VDA द्वारा जारी यह आदेश बनारस में गंगा किनारे मकानों का संचयन, मरम्मत और पुनर्निर्माण अब कहीं ज़्यादा सुव्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावशाली तरीके से होगा। स्थानीय जोनल कार्यालयों से सीधे जुड़कर, स्वामी अब नियमों का पालन करते हुए अपनी संपत्ति को सुरक्षित रख पाएंगे। साथ ही, प्रशासन की नई समयसीमा की जिम्मेदारी से प्रक्रिया प्रभावी, जवाबदेह व तेज हुई है।

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