परिचय:
UNSC की अध्यक्षता में पाकिस्तान और उसकी भारत-विरोधी चाल जुलाई 2025 में पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक मासिक अध्यक्षता संभाली है, जो इसे 15 सदस्यों वाले इस प्रभावशाली मंच पर एक समर्पित नेतृत्व देने वाला फैसला है । इस मौके पर उसने तुरंत भारत-प्रतिरोधी कूटनीतिक रणनीति अपनाई, जिसे भारत ने साजिश और “प्रोपेगैंडा” करार दिया।
▶ पाकिस्तान की कश्मीर रणनीति
UNSC की अध्यक्षता में पाकिस्तान और उसकी भारत-विरोधी चाल अध्यक्षता मिलते ही पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दा फिर UNSC के एजेंडे पर लाने की कोशिश की। इसके राजदूत, असीम इक़्तिख़ार अहमद, ने ऐलान किया कि “कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय रूप से कार्रवाई की जाए” । उन्होंने कहा कि UNSC को अब कश्मीर से नज़र हटाकर समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। यह वही पुराना “कश्मीर विवाद” री-ब्रांड रणनीति है, जिसका भारत वर्षों से मुख़ातिब रहा है—पर वह इसे द्विपक्षीय दृष्टिकोण से सुलझाना चाहता रहा है ।
▶ भारत की प्रतिक्रिया और आक्रामक कूटनीति
UNSC की अध्यक्षता में पाकिस्तान और उसकी भारत-विरोधी चाल भारत ने पाकिस्तान की इस चाल का तुरंत जवाब देते हुए कहा कि वह द्विपक्षीय समझौते (जैसे शिमला समझौता) का उल्लंघन करने की बात कर रहा है navbharatlive.com। इसके अलावा, भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले (22 अप्रैल) का ज़िम्मेदार पाकिस्तान को ठहराते हुए सिद्ध किया कि उसने “ऑपरेशन सिंदूर” के ज़रिए जवाब दिया था । इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों का हाथ था, और भारत ने इस घटना को UNSC प्रधान मंच पर उजागर किया ।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस अवसर पर पाकिस्तान को आतंकवाद में संलिप्त करार दिया, जबकि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने इसे “आतंकवाद का वैश्विक केंद्र” कह डाला। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी पहलगाम हमले की निंदा की और शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया \
▶ भारत की अंतरराष्ट्रीय सामने स्थिति
UNSC की अध्यक्षता में पाकिस्तान और उसकी भारत-विरोधी चाल भारत ने “द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ टेररिज़्म” नामक प्रदर्शनी की व्यवस्था की, जिसमें उसने खुद के साथ-साथ 9/11 जैसे वैश्विक आतंकवादी हमलों पर प्रकाश डाला । इसके अलावा, भारत के मिज़ाइल-धीरो नीति, SDG पर उपलब्धियों और संवेदनशील मानवीय दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर दिखाने की रणनीति है
▶ क्वाड और वैश्विक समर्थन
UNSC की अध्यक्षता में पाकिस्तान और उसकी भारत-विरोधी चाल इसी समय, क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) ने पहलगाम हमला निंदा किया और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता जताई । इसने पाकिस्तान के एकतरफा प्रचार को महत्त्वहीन बनाने में भारत का साथ दिया और क्षेत्रीय सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया। भारत ने आतंकवाद के आरोपों में पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करने का रणनीतिक समर्थन पाया।
▶ पाकिस्तान का जवाब और भारत के मोर्चे
पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने जाने-माने आरोप दोहराए— कि भारत युद्ध के लिए तैयार है, उसने एकतरफा रूप से सिंधु जल संधि निलंबित की, और उसे बार-बार शांति की दिशा अपनाने की जरूरत बताई hindi.news24online.com+1navbharattimes.indiatimes.com+1। उसने कहा कि भारत ने “बेसलेस” आरोप लगाए हैं, जबकि वह शांति चाहता है और वार्ता की भावना रखता है
▶ विशेषज्ञों की नज़र
विश्लेषक कह रहे हैं कि पाकिस्तान की यह अध्यक्षता रणनीतिक रूप से देखी जाएगी, लेकिन UNSC में उसका वास्तविक प्रभाव सीमित रहेगा क्योंकि उसके पास वीटो का अधिकार नहीं है timesofindia.indiatimes.com+2livehindustan.com+2navbharattimes.indiatimes.com+2। हालांकि, वह कई सहायक समितियों (जैसे तालिबान प्रतिबंध समिति) का अध्यक्ष भी है, जिसे वह भारत की आलोचना के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकता है ।
🔍 निष्कर्ष
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कूटनीतिक संघर्ष: पाकिस्तान ने अध्यक्षता मिलते ही कश्मीर मुद्दा उठाकर भारत के खिलाफ प्रचार तेज किया है—जिसे भारत ने अंतरराष्ट्रीय रूप से बेनकाब किया।
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भारत की रणनीति: भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर”, SDG और मानवतावादी दृष्टिकोण से अपनी बात रखी, और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाया।
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वैश्विक समर्थन की भूमिका: क्वाड और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से मिली सहमति ने भारत की स्थिति को मजबूत किया।
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स्थानीय प्रभाव: पाकिस्तान की हालिया उपस्थिति शक्तिशाली जरूर है, लेकिन procedural अधिकारों तक सीमित है—भारत इसकी पूरी तैयारी पहले ही कर चुका है।