India at this year’s Independence Day 2025 ‘एट होम’ में पूर्वी भारत के शिल्पों का अनोखा स्वाद

India at this year’s Independence Day 2025 दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में हर वर्ष की तरह इस बार भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘एट होम’ समारोह आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय संस्कृति की विविधता को प्रदर्शित किया गया। इस विशेष आयोजन में पूर्वी भारत के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक शिल्पों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया, जिससे भारतीयता के गहरे रंगों और शिल्प की सुंदरता को महसूस किया जा सका।

पूर्वी भारत के शिल्पों की विशेषताएँ

India at this year’s Independence Day 2025 पूर्वी भारत, जिसमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और असम जैसे राज्य शामिल हैं, अपनी सांस्कृतिक विविधता और कला शिल्प के लिए प्रसिद्ध है। यहां की हस्तशिल्प और पारंपरिक कला भारतीय शिल्प संस्कृति के अमूल्य रत्न हैं। इस वर्ष के ‘एट होम’ समारोह में इन शिल्पों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया।

पश्चिम बंगाल का संजीवनी चित्रकला

पश्चिम बंगाल की संजीवनी चित्रकला (Pattachitra) और हाथ से बनी जड़ी-बूटियों से रंगाई गई कृतियाँ सभी दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही थीं। इन चित्रकलाओं में धार्मिक और पौराणिक कथाएँ प्रकट की जाती हैं, जो न केवल देखने में सुंदर होती हैं बल्कि इनमें समृद्ध इतिहास और संस्कृति की छाया भी देखने को मिलती है।

ओडिशा का रुखिया और कांसा

ओडिशा के कारीगरों द्वारा निर्मित कांसे की मूर्तियाँ और रुखिया (धातु और लकड़ी से बनी कारीगरी) इस आयोजन की आकर्षण का केन्द्र बनीं। ओडिशा की कांसा कला, जो प्राचीन समय से चली आ रही है, को इस समारोह में प्रमुख स्थान दिया गया। यह कला न केवल दृश्य सौंदर्य से भरपूर होती है, बल्कि इसके साथ जुड़ी कड़ी मेहनत और धैर्य भी इसे एक विशेष स्थान दिलाता है।

बिहार की मधुबनी कला

बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग भी इस आयोजन का हिस्सा बनी। ये चित्रकलाएँ भारतीय आदिवासी कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिसमें पारंपरिक रूप से धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक तत्वों को चित्रित किया जाता है। इन पेंटिंग्स में प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है और ये सूती कपड़े या कागज पर बनाई जाती हैं। मधुबनी पेंटिंग्स का यह प्रदर्शनी भारत की शिल्प कला की गहराई और परंपरा को प्रदर्शित करती है।

झारखंड की कारीगरी

झारखंड की पारंपरिक काष्ठ कला भी इस आयोजन में प्रमुख थी। लकड़ी से बनी विभिन्न वस्तुएं जैसे मूर्तियाँ, बर्तन और सजावटी सामान ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। झारखंड के कारीगरों द्वारा हाथ से बनाई गई ये कृतियाँ भारतीय शिल्प की बारीकी और शुद्धता को बखूबी दर्शाती हैं।

असम की बुनाई और हाथ से बनी वस्तुएं

असम की बुनाई कला भी इस वर्ष के समारोह में विशेष रूप से प्रदर्शित की गई। असम का वस्त्र उद्योग, खासकर महल हाउस और असमी साड़ी की सुंदरता को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। असम के हस्तशिल्प के तहत विभिन्न प्रकार की कढ़ाई और बुनाई का काम प्रस्तुत किया गया, जो न केवल अद्भुत था बल्कि हर डिजाइन में असम की मिट्टी और संस्कृति की छाप भी नजर आ रही थी।

पूर्वी भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता

इस आयोजन में पूर्वी भारत की शिल्प कला ने यह साबित कर दिया कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता उसकी शक्ति है। इस वर्ष के ‘एट होम’ समारोह ने ना केवल शिल्प की महत्ता को उजागर किया, बल्कि इससे यह संदेश भी दिया कि भारतीय शिल्प और संस्कृति के ये पारंपरिक रूप पूरी दुनिया में पहचान बना रहे हैं।

इस तरह के आयोजनों से न केवल भारतीय शिल्पकला को एक मंच मिलता है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों में जागरूकता और प्रेम बढ़ाने का भी एक सशक्त माध्यम बनता है।

निष्कर्ष

India  at this year’s Independence Day 2025 स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम’ समारोह ने भारतीय शिल्प की एक समृद्ध और विविध दुनिया को पेश किया। इसने भारतीय शिल्पकला को नई पहचान दिलाई और दर्शकों को पूर्वी भारत के कला रूपों और उनकी सांस्कृतिक धरोहर से अवगत कराया। यह आयोजन इस बात का उदाहरण है कि कैसे पारंपरिक कला और शिल्प भारतीय समाज में आज भी जीवित हैं और भविष्य में भी इनका महत्व बना रहेगा।

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